23 Jun 2026
• UNCTAD के अनुसार, 2025 में भारत की शिप रीसाइक्लिंग हिस्सेदारी बढ़कर 35.4% हो गई है, जो दुनिया में सबसे ज़्यादा है।
• भारत ने ‘मैरीटाइम इंडिया विज़न 2030’ के तहत शिप रीसाइक्लिंग का लक्ष्य तय समय से पांच साल पहले ही हासिल कर लिया है।
• सर्बानंद सोनोवाल का कहना है कि पीएम मोदी के मैरीटाइम सुधारों की वजह से भारत ग्लोबल शिप रीसाइक्लिंग में नंबर 1 बन गया है।
2025 में भारत दुनिया का सबसे बड़ा जहाज़ रीसाइक्लिंग देश बन गया है और वैश्विक स्तर पर पहले स्थान पर है। यूनाइटेड नेशंस कॉन्फ्रेंस ऑन ट्रेड एंड डेवलपमेंट (UNCTAD) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में 30.1% के मुकाबले 2025 में वैश्विक जहाज़ रीसाइक्लिंग में भारत की हिस्सेदारी बढ़कर 35.4% हो गई। भारत में जहाज़ रीसाइक्लिंग का काम काफ़ी बढ़कर 2025 में 2.99 मिलियन ग्रॉस टन (GT) हो गया, जो 2024 के 1.86 मिलियन GT से लगभग 60% ज़्यादा है। इस उपलब्धि के साथ, ‘मैरीटाइम इंडिया विज़न (MIV) 2030’ के तहत दुनिया का सबसे बड़ा जहाज़ रीसाइक्लिंग देश बनने का लक्ष्य समय से पहले ही हासिल कर लिया गया है।
यह उपलब्धि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत सरकार द्वारा किए गए समुद्री नीति सुधारों और ‘ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस’ (कारोबार में आसानी) से जुड़ी पहलों के असर को दिखाती है।
इस मौके पर, केंद्रीय बंदरगाह, जहाज़रानी और जलमार्ग मंत्री (MoPSW) सर्बानंद सोनोवाल ने कहा, “दुनिया के शीर्ष जहाज़ रीसाइक्लिंग देश के तौर पर भारत का उभरना, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में लगातार नीतिगत सुधारों, इंडस्ट्री की कोशिशों और अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण व सुरक्षा मानकों के पालन की सफलता को दर्शाता है। यह ज़िम्मेदार और टिकाऊ जहाज़ रीसाइक्लिंग के लिए भारत की वैश्विक केंद्र (हब) वाली स्थिति को और मज़बूत करता है।”
सरकार की मुख्य पहलें
भारत के जहाज रीसाइक्लिंग इकोसिस्टम को मजबूत करने और ग्लोबल मार्केट में बड़ी हिस्सेदारी हासिल करने के लिए, बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय (MoPSW) ने कई पहलें की हैं:
हांगकांग कन्वेंशन का पालन:
भारत सरकार ने ‘जहाजों की रीसाइक्लिंग अधिनियम, 2019’ लागू किया। इसका मकसद जहाजों की सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल रीसाइक्लिंग के लिए ‘हांगकांग इंटरनेशनल कन्वेंशन’ (HKC) के अनुरूप एक इकोसिस्टम बनाना था; भारत ने 2019 में इस कन्वेंशन को मंज़ूरी दी थी।
सरकार ने जहाज रीसाइक्लिंग यार्ड के आधुनिकीकरण के लिए ₹53.5 करोड़ की आर्थिक मदद दी है, जिससे 115 सुविधाओं को HKC के नियमों के अनुरूप बनने में मदद मिली है।
शिप-ब्रेकिंग क्रेडिट नोट योजना:
MoPSW ने ‘शिप-ब्रेकिंग क्रेडिट नोट योजना’ शुरू की, जिसके तहत जहाज मालिकों को रीसायकल किए गए जहाज की स्क्रैप वैल्यू के 40% के बराबर क्रेडिट नोट मिलता है। इस क्रेडिट नोट का इस्तेमाल भारतीय शिपयार्ड में बने नए जहाज की कीमत के 5% तक के भुगतान के लिए किया जा सकता है, जिससे जहाज रीसाइक्लिंग और घरेलू जहाज निर्माण, दोनों को बढ़ावा मिलता है।
स्टेकहोल्डर एंगेजमेंट (हितधारकों के साथ जुड़ाव):
MoPSW चुनौतियों की पहचान करने और खास समाधान लागू करने के लिए गुजरात मैरीटाइम बोर्ड, शिप रीसाइक्लिंग इंडस्ट्रीज़ एसोसिएशन, ग्लोबल शिपिंग कंपनियों, कैश खरीदारों, क्लासिफिकेशन सोसायटियों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ नियमित रूप से बातचीत करता है।
यूरोपीय संघ के शिप रीसाइक्लिंग नियमों (EUSRR) में शामिल होना:
भारत सरकार यूरोपीय संघ की रीसाइक्लिंग सुविधाओं की मंज़ूर सूची में भारतीय शिप रीसाइक्लिंग यार्ड को शामिल कराने के लिए सक्रिय रूप से प्रयास कर रही है। मंज़ूरी की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए संबंधित अधिकारियों के साथ लगातार बातचीत चल रही है।
अलंग शिप रीसाइक्लिंग यार्ड का विस्तार:
भारत का लक्ष्य अलंग शिप रीसाइक्लिंग यार्ड के नियोजित विस्तार के ज़रिए अपनी शिप रीसाइक्लिंग क्षमता को लगभग दोगुना करके 9 मिलियन लाइट डिस्प्लेसमेंट टन (LDT) तक पहुंचाना है। गुजरात सरकार ने भविष्य की मांग को पूरा करने, बुनियादी ढांचे में सुधार करने और ग्लोबल मार्केट में भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाने के लिए एक व्यापक मास्टर प्लान तैयार किया है।
तेज़ विकास की संभावनाएँ
बाल्टिक एंड इंटरनेशनल मैरीटाइम काउंसिल (BIMCO) के अनुसार, अगले दशक में दुनिया भर में 16,000 से ज़्यादा जहाजों के रीसायकल होने की उम्मीद है। 35.4% की मौजूदा मार्केट हिस्सेदारी के साथ, भारत सालाना लगभग 500 से 600 जहाजों को रीसायकल करने और अपनी शिप रीसाइक्लिंग क्षमता का विस्तार जारी रखने की अच्छी स्थिति में है।
शिप रीसाइक्लिंग का टिकाऊ भविष्य
ग्लोबल शिप रीसाइक्लिंग में भारत का शीर्ष स्थान पर पहुँचना, स्थिरता, नियामक सुधारों, बुनियादी ढांचे के विकास और उद्योग के सहयोग पर केंद्रित एक समन्वित रणनीति का परिणाम है। भविष्य की मज़बूत मांग, अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन बढ़ने और सरकार के लगातार समर्थन के साथ, भारत शिप रीसाइक्लिंग में अपनी अग्रणी स्थिति को मज़बूत करने के साथ-साथ सर्कुलर इकोनॉमी और टिकाऊ समुद्री विकास के लक्ष्यों को आगे बढ़ाने की अच्छी स्थिति में है।